एम.नसीम की कलम से
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18 वीं लोकसभा का दूसरा मानसून सत्र चुनाव आयोग के नाम रहा। एसआईआर के हंगामे से शुरु हुआ सत्र वोट चोर ‘ गद्दी छोङ ‘की गूंज से समाप्त हुआ। 9 दिवसीय सत्र में दोनों सदन में 27 प्रस्ताव बिन चर्चा के थ्वनिमत से पारित भी हुए।
सदन की शुरूआत ही बिहार में चल रहे मतदाता सूची सघन पुनरीक्षण क्रियान्वयन में गङबङी को लेकर विपक्ष के पुरजोर हंगामे से हुई। उपराष्ट्रपति जगदीश धनखङ के इस्तीफे को लेकर विपक्ष की ओर से भारी हंगामा रहा। जस्टिस यशवंत वर्मा के महाभियोग पर भी खासी चर्चा हुई। यही नहीं विपक्ष ने आपरेशन सिंदूर और सीजफायर पर सरकार की घेरे बंदी भी की। निर्वाचन आयोग पर तो दोहरे आरोप लगे। एसआईआर का मामला सुर्खियों में चल ही रहा था। 18वीं लोकसभा चुनाव में बङे पैमाने पर हुई वोट चोरी मामले का आरोप भी विपक्ष ने सत्ता पर मढने की पुरजोर कोशिश कर ही दी। अंतिम दिन तक सदन में चुनाव आयोग का नाम ही गूंजता रहा। यह अलग बात रही कि निशाने पर सीधे सत्ता पर काबिज आलाकमान रहे। अंततः ‘ वोट चोर गद्दी छोङ ‘ नारे के बीच ही सदन का समापन भी हो गया। यहां तक कि समूचे सत्र में विपक्ष और सत्ता के बीच में बनी खाई बरकरार रही । इस खाई के बीच हङबङी में ही लोकसभा में 12 और राज्यसभा में 15 प्रस्ताव बगैर चर्चा ध्वनि मत से पारित भी कर दिए गये ।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा सदन में विपक्ष ने नियोजित हंगामा किया। कहा कि दुनियां के सबसे बङे लोकतंत्र के सदन में विपक्ष के व्यवहार से निराशा मिली। जो सदन की मर्यादा और लोकतंत्र के अनुरुप नहीं रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमन्त्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, पियूष गोयल, किरन रिजिजू आदि सत्तापक्ष शामिल रहे।
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