अनिल द्विवेदी की रिपोर्ट
चन्दौली चहनिया पट्टी गांव मे हो रही भागवत कथा के दूसरे दिन महात्म की कथा श्रवण करा रहे काशी मे पधारे राकेश गर्गाचार्य जी महराज ने बताया किश्रीमद भागवत पुराण सभी शास्त्रों का सार है। भगवान यह नहीं कहते की उन्हें दान दो, खेत लिखकर दो; बल्कि मुझे अपना मानकर प्रेम करो। जैसे रोता हुआ बच्चा हुआ कोई कितना भी प्रयास क्यों न करे, वह चुप नहीं होता पर उसके मा की एक थपकी मात्र से वह चुप हो जाता है क्योंकि मा से दूरी के एहसास ने ही तो वह रो रहा था। ठिक उसी तरह हमारे दुःख का कारण भी भगवान से दूरी ही है। हम भगवान से दूरी बनाकर सांसारिक वस्तु से आसक्ति बढाते हैं। हम चाहते हैं की वो हमेशा हमारे पास रहे। मिटने वाली वस्तु यानी से आसक्ति ही हमारे दुःख का कारण है। वस्तु या व्यक्ति से संबंध जितना ही घनिष्ठ हो, हमें उतना ही रुलाता है। यह शरीर जिसे हम अपना समझते हैं वो भी हमें एक दिन छोडना होगा। जिसे शरीर से आसक्ति नहीं
होगा, वो शरीर छूटने का भी भय नहीं होगा।भागवत कथा श्रवण से प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है, जैसा कि आत्मदेव ब्राह्मण के पुत्र धुंधकारी के साथ हुआ। गोकर्ण जी के द्वारा भागवत कथा सुनने पर ही धुंधकारी प्रेत योनि से मुक्त हुआ।भागवत कथा सुनने से भक्तों के सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं और उन्हें आध्यात्मिक आनंद की प्राप्ति होती है।








