वाराणसी, 17 सितम्बर। राष्ट्रव्यापी “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” एवं “पोषण माह” अभियान का शुभारंभ आज बरेका में किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशव्यापी अभियान की शुरुआत के उपरांत बरेका महाप्रबंधक श्री नरेश पाल सिंह ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। अभियान की जानकारी देते हुए प्रमुख मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश कुमार ने बताया कि यह कार्यक्रम 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान महिलाओं व बच्चों के लिए विशेष स्वास्थ्य परीक्षण, जांच और उपचार की व्यवस्था की गई है। इसमें मेडिसिन, सर्जरी, ईएनटी, नेत्र, शिशु रोग, स्त्री रोग, मानसिक स्वास्थ्य और दंत रोग विशेषज्ञ शामिल रहेंगे।अभियान के अंतर्गत संतुलित आहार पर व्याख्यान, काउंसिलिंग तथा तेल के उपभोग में कमी लाने की अपील की जाएगी। किशोरियों को माहवारी स्वच्छता पर स्वास्थ्य शिक्षा दी जाएगी। इसके अलावा टीबी मुक्त भारत अभियान को आगे बढ़ाने हेतु “निश्चय मित्रों” का पंजीकरण होगा, जो मरीजों को जांच, उपचार और पोषण पोटली उपलब्ध कराएंगे।इस दौरान बृहद रक्तदान शिविर का भी आयोजन
किया जाएगा, जिसमें रक्त संकलन के साथ रक्तदान शपथ और जागरूकता कार्यक्रम संपन्न होंगे।कार्यक्रम का संचालन स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मधुलिका सिंह ने किया और अभियान को सफल बनाने हेतु सभी चिकित्साकर्मियों से सक्रिय सहयोग का आह्वान किया। महिला कल्याण संगठन की सदस्याएं श्रीमती पूनम सिंह, श्वेता सिंह एवं अन्य पदाधिकारियों ने भी अभियान को गति देने का संकल्प लिया। इस अवसर पर बरेका के वरिष्ठ अधिकारीगण — प्रमुख मुख्य विद्युत इंजीनियर श्री एस.के. श्रीवास्तव, प्रधान वित्त सलाहकार श्री मुक्तेश मित्तल, प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी श्री लाल जी चौधरी, मुख्य विद्युत इंजीनियर (निरीक्षण) श्री मनोज कुमार गुप्ता, मुख्य संरक्षा अधिकारी श्री राम जन्म चौबे, मुख्य यांत्रिक इंजीनियर (सर्विस) श्री नीरज जैन, उपमहाप्रबंधक श्री अनुज कटियार समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे और अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया। अभियान के उद्घाटन अवसर पर डॉ. मधुलिका सिंह, डॉ. प्रेक्षा पांडेय (स्त्री रोग विशेषज्ञ), डॉ. विजय कुमार दुर्गा प्रसाद व डॉ. अमित गुप्ता (अस्थि रोग विशेषज्ञ), डॉ. मिन्हाज अहमद व डॉ. एस.के. मौर्य (फिजीशियन), डॉ. विशाल मिश्र व डॉ. सौरभ सागर (निश्चेतना विशेषज्ञ) सहित बरेका चिकित्सालय के अन्य चिकित्सकों ने विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। नर्सिंग, फार्मेसी, लैब एवं सहायक स्टाफ ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।








