वाराणसी के प्रमुख संसदीय क्षेत्र में अवैध निर्माण का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा मामला कमच्छा का है, जहां सेंट्रल हिंदू स्कूल (CHS) के ठीक सामने एक विशाल भवन हरी चादर की आड़ में, प्रशासन की आंखों से दूर चोरी-छिपे बनाया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस निर्माण की अनुमति दिलाने के लिए मोटी रकम एक बड़े अधिकारी को दी गई है, जिससे भ्रष्टाचार के आरोप और भी गहराते जा रहे हैं। वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) व जिला प्रशासन के बड़े-बड़े दावों के बावजूद शहर
में अवैध इमारतों का निर्माण जारी है। हाल ही में प्रशासन ने कई क्षेत्रों में बुलडोजर चलाया, अवैध निर्माणों को सील किया और ढहाया गया, फिर भी कमच्छा जैसे इलाकों में चोरी-छिपे बड़ी इमारतें खड़ी की जा रही हैं. रिंग रोड के पास 4 बीघा में भी अवैध प्लॉटिंग ध्वस्त की गई, लेकिन बाकी जगहों पर निर्माणकर्ता प्रशासन को धता बताते नजर आ रहे हैं।छात्रों से गुलजार CHS स्कूल के सामने, दोनों तरफ उन प्रमुख सड़कों के बीच अवैध रूप से भवन निर्माण हो रहा है, जो भेलूपुर-दुर्गाकुंड और सिगरा-रथ यात्रा की ओर जाती हैं। स्थानीय नागरिकों का सवाल है – अगर ऊपर से एक ईंट गिर गई और सड़क पर कोई हादसा हो गया तो ज़िम्मेदार कौन होगा? प्रशासन बार-बार चेतावनी देता है कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा के मानकों की अनदेखी बिलकुल बर्दाश्त नहीं होगी, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर स्थिति गंभीर बनी हुई है। भवन निर्माण की अनुमति के लिए कथित रूप से भारी धनराशि देने की बातें अब खबरों व स्थानीय चर्चाओं में आम हो गई हैं। ऐसे मामलों में जिला प्रशासन और विकास प्राधिकरण अपनी जवाबदेही से किनारा नहीं कर सकते। नोटिस देने और सील करने की कार्रवाई तो दिखावे की रह जाती है, लेकिन इमारतें रातों-रात तैयार हो जाती हैं। स्थानीय जनता
को चाहिए कि वे ऐसे निर्माण कार्यों की शिकायत तुरंत संबंधित सरकारी विभागों तक पहुंचाएं। शहर की पहचान धार्मिक, ऐतिहासिक और शैक्षिक धरोहरों में है, जिसे अवैध निर्माण से गंभीर खतरा है। जब तक प्रशासन और विकास प्राधिकरण कड़े और निरंतर कदम नहीं उठाते, अवैध निर्माणकर्ता बेखौफ रहेंगे और भविष्य में कोई जानमाल का नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी इन निर्माण कार्यों के स्वामियों के साथ-साथ प्रशासन की भी होगी।








