मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी में अब कबूतरों को दाना डालना भी लोगों पर भारी पड़ सकता है। बांद्रा पुलिस ने स्वच्छता नियमों का उल्लंघन करने पर चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोपियों की पहचान मेहताब अहमद शेख, निखिल हरिनाथ सरोज और सलाम दुर्गेश कुमार के रूप में हुई है, जबकि एक महिला भी इस मामले में शामिल है। बताया जा रहा है कि ये सभी निजी कंपनियों में कार्यरत हैं। नगर निगम (BMC) और स्वास्थ्य विभाग ने कई बार यह स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थलों पर कबूतरों को दाना डालना न केवल गंदगी फैलाता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है। कबूतरों की बीट से हिस्टोप्लाज्मोसिस, क्रिप्टोकोकोसिस और एलेर्जिक ब्रोंकाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों का मानना है कि ऐसे रोग सीधे तौर पर फेफड़ों को प्रभावित करते हैं और अस्थमा के मरीजों के लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं। बीएमसी ने पहले भी कई बार जागरूकता अभियान चलाए और जगह-जगह बोर्ड लगाकर कबूतरों को दाना न डालने की अपील की। इसके साथ ही नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी किया गया है। जानकारी के अनुसार, बीएमसी की गाइडलाइन में यह साफ लिखा गया है कि सार्वजनिक स्थानों जैसे सड़क, फुटपाथ, चौक और इमारतों के बाहर कबूतरों को दाना डालना प्रतिबंधित है। नियम तोड़ने वालों पर ₹100 से ₹500 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी की जा सकती है। पिछले कुछ वर्षों में मुंबई में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब कबूतरों की वजह से सोसायटी और बाजार इलाकों में गंदगी और बीमारियों का खतरा बढ़ा। बीएमसी के अनुसार, लगातार अपीलों और जुर्माने के बावजूद लोग आदत नहीं छोड़ रहे थे, जिसके चलते अब पुलिस भी कार्रवाई में उतर आई है। स्थानीय निवासियों ने पुलिस और बीएमसी की इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि कबूतरों को दाना डालने से ज्यादा जरूरी है शहर को साफ-सुथरा रखना। कई लोग मानते हैं कि परंपरा और आस्था के नाम पर गंदगी फैलाने वालों पर रोक लगाना बेहद जरूरी है। मुंबई पुलिस ने साफ संकेत दिया है कि भविष्य में भी अगर कोई व्यक्ति इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।








