नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि कोई भी अधिवक्ता एक साथ पत्रकारिता नहीं कर सकता। अदालत ने टिप्पणी की कि वकील और पत्रकार की दोहरी भूमिका पेशेवर कदाचार मानी जाएगी। यह मामला मोहम्मद कमरान बनाम राज्य (उत्तर प्रदेश) से जुड़ा है, जिसकी सुनवाई के दौरान अदालत ने यह रुख स्पष्ट किया। 21 अक्तूबर 2024 को न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि वकील को यह चुनना होगा कि वह अधिवक्ता रहेगा या पत्रकार — दोनों भूमिकाएँ एक साथ निभाना स्वीकार्य नहीं हैं। अदालत ने इस विषय पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से जवाब माँगा।
इसके बाद बार काउंसिल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसके नियमों (रूल 49) के तहत अधिवक्ता किसी अन्य पूर्णकालिक पेशे में शामिल नहीं हो सकता। विशेषकर पत्रकारिता को वकालत के साथ जोड़ना वर्जित है, क्योंकि इससे हित-संघर्ष और नैतिक दायित्वों का टकराव पैदा होता है।
वहीं, याचिकाकर्ता अधिवक्ता मोहम्मद कमरान ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि वह अब पत्रकारिता नहीं कर रहे हैं और केवल वकालत करेंगे। अदालत ने बार काउंसिल की दलीलों और कमरान के हलफनामे को रिकॉर्ड पर लिया और मामले की अगली सुनवाई सूचीबद्ध कर दी।
अदालत की इस टिप्पणी के बाद साफ है कि कोई भी अधिवक्ता पत्रकारिता जैसे दूसरे पेशे में सक्रिय नहीं रह सकता। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख आने वाले समय में ऐसे अधिवक्ताओं के लिए नज़ीर बनेगा, जो खुद को पत्रकार भी बताते हैं।








