वाराणसी। कैंट थाने में तैनात दारोगा पर हुए हमले के मामले में पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए सोमवार देर रात करीब 12:45 बजे मुकदमा दर्ज किया। घायल दारोगा की तहरीर पर 10 नामजद और 60 अज्ञात वकीलों को आरोपित बनाया गया है। नामजद आरोपियों में अजीत मौर्या, मोहित मौर्या, अजीत वर्मा उर्फ राजा, राजन पांडेय, शेखर यादव, अजीत सिंह, सुमित सिंह, आलोक सौरभ, प्रकाश शंकर श्रीवास्तव और ईशान शामिल हैं। इनके अलावा 60 अन्य अज्ञात आरोपियों को भी मुकदमे में घेरा गया है। पुलिस ने इन पर हत्या का प्रयास, गैरइरादतन हत्या का प्रयास, बलवा, गैरकानूनी जमावड़ा, धारदार हथियार से हमला, सरकारी कर्मचारी पर हमला, सरकारी कार्य में बाधा, डकैती, डकैती के दौरान चोट पहुंचाना और 7 सीएलए एक्ट समेत कई गंभीर धाराएं लगाई हैं। तहरीर के अनुसार, आरोपी वकीलों ने संगठित होकर दारोगा को घेर लिया। गाली-गलौज करने के बाद जान से मारने की नीयत से हमला किया गया। धारदार हथियारों से घायल कर उन्हें मरणासन्न अवस्था में नाले में फेंक दिया गया। इस दौरान उनका पर्स, जिसमें पहचान पत्र, पुलिस परिचय पत्र और 4200 रुपये थे, छीन लिया गया और उनकी वर्दी फाड़ दी गई। घटना के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने देर रात कैंट थाने पहुंचकर घटना की जानकारी ली और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की। पुलिस का कहना है कि नामजद अभियुक्तों की तलाश तेज कर दी गई है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर कठोर कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद कानूनी गलियारों में भी खलबली मच गई है। कुछ वकीलों ने आरोप लगाया है कि पुलिस पक्ष अपनी कमियों को छिपाने के लिए मनमाने ढंग से नामजदगी कर रही है। वहीं, बार एसोसिएशन ने बैठक बुलाकर पूरे मामले पर चर्चा करने की बात कही है। घटना के बाद कैंट क्षेत्र में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न उत्पन्न हो। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।








