वाराणसी।नवरात्रि के पर्व के दौरान जहां पूरे देश में उत्साह और उमंग का ऐसा माहौल देखने को मिलता है कि हर मंदिर और पंडाल श्रद्धालुओं से पटा रहता है, वहीं शूल टंकेश्वर महादेव मंदिर इस बार एकदम खाली नजर आया। आमतौर पर यह शिव मंदिर भक्तों की भीड़ से घिरा रहता है, लेकिन इस नवरात्रि में इसकी चौखट पर सुकून की नीरवता छाई रही। नवरात्रि की

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धूम-धड़ाक के बावजूद इस पवित्र स्थान पर भक्तों की उपस्थिति नगण्य रही, जिससे मंदिर परिसर में एक अजीब सी खालीपन और शांति का अनुभव हुआ।विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर के आसपास नवरात्रि के दौरान होने वाली साधारण मनोरंजक आयोजनों और त्योहार के अन्य आकर्षणों के अभाव के कारण श्रद्धालु यहां कम आए हैं। इससे न केवल मंदिर प्रशासन को आर्थिक क्षति हुई है, बल्कि आध्यात्मिक माहौल भी अपेक्षित रूप से जीवंत नहीं रह पाया। इसके अतिरिक्त, इस खास अवधि में कोविड-19 के बाद भी सतर्कता का माहौल और भीड़ से

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बचने की प्रवृत्ति भी एक कारण मानी जा रही है।यह स्थिति नवरात्रि पर्व की धार्मिक गरिमा के साथ-साथ लोक उत्सव की परंपरा के लिए चिंता का विषय भी बनी हुई है, क्योंकि भक्तों की संख्या में असामान्य गिरावट से मंदिर क्षेत्र के सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। शूल टंकेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी और स्थानीय राजनैतिक प्रतिनिधि भी इस कमी पर गंभीर नजर रखे हुए हैं और सुधार के लिए रणनीतियां बनाने का प्रयास कर रहे हैं।इस नवरात्रि में भीड़ से दूर, मंदिर की शांत छाया ने एक बार फिर याद दिलाया कि धर्म और श्रद्धा के रंग कभी-कभी भीड़-भाड़ से परे, अपने स्वयं के सधे हुए स्वरूप में भी उपस्थित रहती हैं। हालांकि, आगामी त्यौहारों के दौरान पुनः श्रद्धालुओं की लहर वापस आने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है।








